उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं की होगी वतन वापसी; युवतियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, कोर्ट ने डिपोर्टेशन प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश
बिलासपुर, 18 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद रायपुर डिटेंशन सेंटर में पिछले करीब पांच महीने से बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं की स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने माना कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास सभी दोनों महिलाओं के प्रत्यावर्तन के पक्ष में हैं, ऐसे में मामले में आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
अदालत के आदेश के बाद अब दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सुनवाई के दौरान उज्बेकिस्तान दूतावास ने भी जल्द डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी कराने का अनुरोध किया था।

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 में रायपुर के होटल एरिना बुटिक से दोनों विदेशी महिलाओं को संदिग्ध परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया था। पुलिस को उनकी गतिविधियों के संबंध में सूचना मिली थी। जांच के दौरान उनसे पासपोर्ट, वीजा और भारत में वैध रूप से रहने से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
इसके बाद दोनों महिलाओं को रायपुर सेंट्रल जेल परिसर स्थित डिटेंशन सेंटर में रखा गया। पूछताछ के दौरान भी उन्होंने लंबे समय तक अपनी पहचान और यात्रा से जुड़ी जानकारी साझा नहीं की। बाद में उनके खिलाफ आव्रजन और विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया।

सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अदालत को बताया कि दोनों महिलाओं को उनके देश वापस भेजने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने डिपोर्टेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
अब भारतीय एजेंसियां पहचान सत्यापन, यात्रा दस्तावेज तैयार करने और उज्बेकिस्तान दूतावास के साथ समन्वय की प्रक्रिया पूरी करेंगी, जिसके बाद दोनों महिलाओं को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा।











