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बिलासपुर में बेटियां असुरक्षित? सिरगिट्टी में फिर दो सात वर्षीय मासूम बच्चियों से दुष्कर्म, पुलिस व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

बिलासपुर, 11 जून 2026. बिलासपुर जिले में लगातार सामने आ रहे दुष्कर्म, गैंगरेप और यौन शोषण के मामलों ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक के बाद एक हुई घटनाओं से लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। खासकर महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अपराध होने के बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए भटकना क्यों पड़ रहा है।

सबसे अधिक चर्चा आज की मानवता को शर्मशार करने वाली सिरगिट्टी थाना क्षेत्र की उन दो सात वर्षीय मासूम बच्चियों के मामले को लेकर है, जिनके साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। पीड़ित बच्चियों की मां ने पुलिस जांच और कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री तक शिकायत भेज दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और शुरुआती स्तर पर कार्रवाई में लापरवाही बरती गई।

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परिजनों का दावा है कि घटना के बाद वे लगातार अधिकारियों और थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बच्चियों ने घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और संभावित साक्ष्यों की जानकारी भी दी थी, इसके बावजूद जांच की गति अपेक्षित नहीं रही। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला आगे बढ़ा।

लगातार सामने आ रही घटनाएं

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इसी बीच रेलवे स्टेशन क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। वहीं एक छात्रा द्वारा शिक्षक पर यौन शोषण के आरोप का मामला भी चर्चा में रहा। इन मामलों में भी पीड़ित पक्षों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि संवेदनशील मामलों में पुलिस की प्राथमिकता आखिर क्या है?

केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से व्यवस्था की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। सबसे बड़ी जरूरत यह है कि पीड़ितों को तत्काल संरक्षण, निष्पक्ष जांच और सम्मानजनक व्यवहार मिले। लेकिन हाल के मामलों में कई परिवारों ने जांच प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया है।

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गैंगरेप से लेकर यौन शोषण तक, बिलासपुर में बढ़ रहे अपराधों ने बढ़ाई चिंता

आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन वर्षों में बिलासपुर जिले में दुष्कर्म के 250 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। लगातार बढ़ते मामलों ने पुलिस की अपराध रोकने की क्षमता और सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब तक अपराध घटित नहीं होता, तब तक सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय क्यों नहीं दिखाई देती। पुलिस को केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि अपराध रोकने वाली संस्था के रूप में भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

एक के बाद एक सामने आ रही घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिलासपुर में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक हैं। अब जनता की नजर पुलिस प्रशासन पर है। सवाल सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो आम नागरिक सुरक्षा व्यवस्था से रखते हैं। यदि पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो यह केवल एक मामले की विफलता नहीं बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न है।

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