LIVE UPDATE

बच्चों के बस्ते का वजन होगा तय? वजन तय करने की अनुशंसा : छत्तीसगढ़ बाल आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को लिखा पत्र

रायपुर। स्कूल जाते समय बच्चों के कंधों पर लटकने वाला भारी बस्ता अब उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा विभाग के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भारी स्कूल बैग से बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक मुद्रा पर पड़ने वाले असर को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग को कई अहम अनुशंसाएं भेजी हैं। आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चे के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

आयोग ने अपनी अनुशंसाओं में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग वजन सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही छोटे बच्चों के लिए होमवर्क में राहत, साल में 10 बैगलेस डे और स्कूलों में बैग का वजन जांचने की व्यवस्था बनाने की बात कही गई है।

ये खबर भी पढ़ें…
तीन बार बुलावा, मंत्री खुद मनाने पहुंचे…फिर भी मंच पर नहीं गए अजय चंद्राकर! मंच छोड़ कार्यकर्ताओं के बीच बैठे रहे, जानिए…
तीन बार बुलावा, मंत्री खुद मनाने पहुंचे…फिर भी मंच पर नहीं गए अजय चंद्राकर! मंच छोड़ कार्यकर्ताओं के बीच बैठे रहे, जानिए…
October 31, 2026
धमतरी, 31 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर की नाराजगी शनिवार को धमतरी में आयोजित पार्टी के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के अनुरूप है। NCERT की नीति में भी कक्षा 1 से 10 तक स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के 10 प्रतिशत तक रखने की सिफारिश की गई है।

किस कक्षा के बच्चे का बस्ता कितना भारी हो?

आयोग ने कक्षावार वजन सीमा के लिए ये सुझाव दिए हैं:

ये खबर भी पढ़ें…
राज्योत्सव 2026 में दिखेगी बदलते बस्तर की तस्वीर, पर्यटन से रोजगार और वन्यजीव संरक्षण तक की झलक
राज्योत्सव 2026 में दिखेगी बदलते बस्तर की तस्वीर, पर्यटन से रोजगार और वन्यजीव संरक्षण तक की झलक
October 31, 2026
रायपुर 31 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में इस बार बदलते बस्तर की तस्वीर खास आकर्षण का केंद्र होगी। वन...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

कक्षा प्रस्तावित बैग वजन
नर्सरी से यूकेजी नो बैग, नो टेक्स्टबुक
कक्षा 1-2 1.6 से 2.2 किलो
कक्षा 3-5 1.7 से 2.5 किलो
कक्षा 6-7 2 से 3 किलो
कक्षा 8 2.5 से 4 किलो
कक्षा 9-10 2.5 से 4.5 किलो
कक्षा 11-12 3.5 से 5 किलो

आयोग ने प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को राहत देने के लिए कक्षा 1 और 2 में होमवर्क नहीं देने की भी अनुशंसा की है। नर्सरी से यूकेजी तक ‘नो बैग, नो टेक्स्टबुक’ व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि शुरुआती उम्र में बच्चों पर किताबों का अनावश्यक बोझ न पड़े।

साल में 10 दिन स्कूल जाएंगे बच्चे, लेकिन बस्ता नहीं होगा साथ

माध्यमिक स्तर पर आयोग ने कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए साल में 10 बैगलेस डे आयोजित करने की अनुशंसा की है। इन दिनों बच्चों को किताबों के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों, हुनर और अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
लौह पुरुष को CM साय ने किया नमन: कहा- सरदार पटेल का राष्ट्रसेवा और एकता का संदेश आने वाली पीढ़ियों को देता रहेगा प्रेरणा
लौह पुरुष को CM साय ने किया नमन: कहा- सरदार पटेल का राष्ट्रसेवा और एकता का संदेश आने वाली पीढ़ियों को देता रहेगा प्रेरणा
October 31, 2026
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज यहाँ सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में भारत रत्न, लौह...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए 10 दिन की बैगलेस अवधि का प्रावधान है। इसके तहत बच्चों को स्थानीय कारीगरों और अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों के काम को समझने तथा व्यावहारिक अनुभव लेने का अवसर देने की बात कही गई है।

स्कूलों में लगेंगी डिजिटल तौल मशीनें?

बस्ते का वजन तय करने के साथ ही आयोग ने स्कूलों की जिम्मेदारी भी बढ़ाने वाले सुझाव दिए हैं। अनुशंसा के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल तौल मशीन और बैग वेट रजिस्टर रखने पर विचार किया जाए। किताबों पर उनका वजन भी अंकित किया जाए, ताकि अभिभावक और विद्यार्थी यह समझ सकें कि कौन-सी किताब कितनी भारी है।

इसके अलावा स्कूलों में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है। इससे बच्चों को रोजाना पानी की भारी बोतल साथ लेकर आने की जरूरत कम हो सकती है। भारी रेफरेंस बुक्स के स्थान पर DIKSHA और e-Pathshala जैसे डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।

अब शिक्षा विभाग के फैसले पर नजर

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शासन से अनुरोध किया है कि इन अनुशंसाओं पर विचार कर प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

फिलहाल आयोग की ओर से अनुशंसाएं भेजी गई हैं। इन्हें लागू करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है। यदि सरकार इन सुझावों पर अमल करती है तो स्कूलों में बच्चों के बस्तों का वजन जांचने से लेकर कक्षा के हिसाब से किताबें और होमवर्क तय करने तक की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *