Chhattisgarh VIP Security Cut: 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती, Z+ से Z हुई सुरक्षा, जानिए…
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद में कमी के बाद 116 नेताओं की VIP सुरक्षा की समीक्षा की है। केदार कश्यप, दीपक बैज समेत कई नेताओं की सुरक्षा श्रेणी बदली गई। जानिए 150 करोड़ के सुरक्षा खर्च से जुड़ी पूरी जानकारी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और बस्तर में सुरक्षा परिस्थितियों में आए बदलाव का असर अब नेताओं के सुरक्षा घेरे पर भी दिखाई देने लगा है। वर्षों से नक्सली खतरे के साये में सुरक्षा घेरे के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की VIP सुरक्षा व्यवस्था में सरकार ने बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। राज्य में 116 जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा श्रेणी घटाई जा रही है। वहीं करीब 40 लोगों की सुरक्षा पूरी तरह वापस लेने और 50 से अधिक लोगों की सुरक्षा का स्तर कम करने की जानकारी भी सामने आई है।
इस फैसले का असर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं पर पड़ रहा है। इनमें कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा और कवासी लखमा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। खास बात यह है कि जिन नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध थी, उनमें से नौ प्रमुख लोगों की सुरक्षा अब Z श्रेणी में की जा रही है।

150 करोड़ रुपये का सालाना खर्च, 1550 जवान VIP सुरक्षा में तैनात
छत्तीसगढ़ में VIP सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से चर्चा और सवालों के घेरे में रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 1550 पुलिसकर्मी और 500 से अधिक वाहन नेताओं तथा विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात हैं। इस पूरी व्यवस्था पर सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
एक तरफ पुलिस बल पर कानून-व्यवस्था संभालने और आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में जवान VIP सुरक्षा में तैनात हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के आधार पर जवानों का बेहतर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

STORY HIGHLIGHTS
-
छत्तीसगढ़ में 116 नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव।
-
नौ प्रमुख नेताओं की Z+ सुरक्षा घटाकर Z की गई।
ये खबर भी पढ़ें…
जींस-टी शर्ट पर बैन: स्कूलों में शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहनने पर बैन, अब फॉर्मल ड्रेस में ही आना होगा स्कूल; ACS ने शुरू कर दी सख्तीOctober 31, 2026School News। स्कूलों में अब ड्रेस कोड लागू हो गया है। शिक्षक पर मनमर्जी ड्रेस पहनकर स्कूल नहीं आ सकेंगे।... -
करीब 40 लोगों की सुरक्षा वापस लेने की जानकारी।
-
50 से अधिक लोगों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती।
-
VIP सुरक्षा में 1550 से अधिक जवान और 500 वाहन तैनात होने की रिपोर्ट।
-
सुरक्षा व्यवस्था पर सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान।
-
छह महीने बाद फिर होगी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा।
Z+ से Z में आए केदार कश्यप और दीपक बैज
सुरक्षा समीक्षा में जिन प्रमुख नामों की श्रेणी बदली गई है, उनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता शामिल हैं। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा और कवासी लखमा के अलावा दिवंगत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
सरकार ने सुरक्षा श्रेणियों को एक स्तर नीचे करने का निर्णय लिया है।
-
Z+ श्रेणी से Z श्रेणी
-
Z श्रेणी से Y+ श्रेणी
-
Y+ श्रेणी से Y श्रेणी
हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की अंतिम सुरक्षा व्यवस्था उसके व्यक्तिगत खतरे के आकलन के आधार पर तय होगी।
विजय शर्मा ने बताया, छह महीने तक किया गया सुरक्षा का आकलन
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन लक्ष्य पूरा होने के तत्काल बाद सभी नेताओं की सुरक्षा समाप्त करना उचित नहीं था।
इसीलिए सरकार ने अगले छह महीनों तक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी परिस्थितियों का आकलन किया। खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा समितियों की समीक्षा के बाद अब चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा कम करने का निर्णय लिया गया है।
गृह मंत्री के मुताबिक, अगले छह महीने बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो सुरक्षा श्रेणी में आगे भी कटौती की जा सकती है।
सिर्फ नेताओं की सुरक्षा नहीं, पुलिस बल के इस्तेमाल पर भी बड़ा सवाल
इस फैसले का एक बड़ा पहलू पुलिस बल का पुनर्विन्यास है। करीब 200 पुलिसकर्मियों के VIP सुरक्षा से मुक्त होने की शुरुआती जानकारी सामने आई है। इन्हें सामान्य पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों में लगाया जा सकता है।
हालांकि, बस्तर में नक्सली गतिविधियां कम होने के बावजूद कुछ राजनीतिक नेताओं और विपक्षी प्रतिनिधियों ने सुरक्षा खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं होने की चिंता जताई है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सुरक्षा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक खतरे की स्थिति को ध्यान में रखने की भी होगी।
अब सबकी नजर गृह विभाग की औपचारिक अधिसूचना और अगले छह महीने की सुरक्षा समीक्षा पर है। यह फैसला केवल VIP सुरक्षा में कटौती नहीं, बल्कि नक्सलवाद के बाद बदलते छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक सुरक्षा ढांचे का भी संकेत है।









