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जहां कभी गूंजती थी गोलियों की आवाज, अब वहां पहुंच रहा विकास! छत्तीसगढ़ में बदल रही बस्तर की तस्वीर, CM साय ने बताया ‘नए बस्तर’ का रोडमैप

नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई राह पर छत्तीसगढ़; सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य से लेकर रोजगार और पर्यटन तक सरकार का फोकस

रायपुर, 31 अगस्त 2026। कभी नक्सल हिंसा के लिए देशभर में चर्चा में रहने वाला बस्तर अब विकास की नई कहानी लिख रहा है। जिन इलाकों में कभी सड़क, स्कूल और अस्पताल पहुंचाना चुनौती माना जाता था, वहां अब शासन की योजनाएं पहुंच रही हैं। सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बस्तर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है और सरकार का दावा है कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम में प्रदेश के विकास और बस्तर में हो रहे बदलावों को लेकर सरकार का रोडमैप सामने रखा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने की दिशा में स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट में 10 प्रमुख मिशन तय किए गए हैं, जिन पर सरकार लगातार काम कर रही है।

नक्सलवाद की चुनौती से विकास की लड़ाई तक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। नक्सली स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों, पुल-पुलियों और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विरोध करते रहे। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन दूरस्थ गांवों को हुआ, जो विकास की मुख्यधारा से लंबे समय तक कटे रहे।

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वर्ष 2023 में राज्य में नई सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर नई रणनीति पर काम शुरू किया।

पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल, सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई और लगातार अभियान के परिणामस्वरूप नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को निर्णायक गति मिली।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है।

सिर्फ सुरक्षा अभियान नहीं, गांवों तक विकास भी पहुंचा

सरकार ने यह समझा कि सिर्फ नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाने से स्थायी शांति स्थापित नहीं होगी। जब तक बस्तर के गांवों और परिवारों तक विकास का लाभ नहीं पहुंचेगा, तब तक बदलाव अधूरा रहेगा। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई।

गोंडी भाषा में ‘नियद नेल्लानार’ का अर्थ ‘आपका अच्छा गांव’ है। योजना के तहत दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को तेजी से पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और तेज करने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी शुरू किया है।

यानी जिस बस्तर में कभी विकास की पहुंच सुरक्षा चुनौतियों के कारण रुक जाती थी, वहां अब सरकार का जोर है कि पहले सुरक्षा और उसके साथ-साथ विकास—दोनों एक साथ आगे बढ़ें।

34 लाख लोगों की जांच, हजारों को मिला इलाज

बस्तर में बदलाव की एक बड़ी तस्वीर स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी दिखाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत अब तक करीब 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है। इनमें से लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। सरकार की कोशिश केवल अस्पतालों तक लोगों को पहुंचाने की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक ले जाने की है।

इसी दिशा में ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के जरिए शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर वहां ठहरता है और लोगों को सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।

बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

अब बस्तर की पहचान सिर्फ नक्सलवाद से नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक खूबसूरती, आदिवासी संस्कृति और पर्यटन क्षमता से बनाने की कोशिश की जा रही है।

नक्सलवाद के बाद बस्तर में खुल रहे रोजगार के नए रास्ते

शांति लौटने के साथ बस्तर में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी तैयार किए जा रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के जरिए स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने की दिशा में भी काम हो रहा है।

सरकार का फोकस अब इस बात पर है कि बस्तर के लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम हो और स्थानीय संसाधनों से स्थानीय लोगों की आय बढ़े।

धुड़मारास ने बदली बस्तर की पर्यटन पहचान

बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता अब देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर का धुड़मारास गांव दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक होम-स्टे में रुककर स्थानीय आदिवासी जीवन और संस्कृति को करीब से समझ रहे हैं। सरकार होम-स्टे को बढ़ावा देने के लिए ऋण और अनुदान की सुविधा दे रही है।

नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है, ताकि पर्यटन केवल घूमने तक सीमित न रहे बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का माध्यम बने।

70 सुरक्षा कैंप बनेंगे ‘सेवा डेरा’

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में आगे बढ़ने के साथ खाली हो रहे करीब 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासन और विकास की मौजूदगी को मजबूत करना है।

सरकार की सोच है कि जहां कभी सुरक्षा बलों की मौजूदगी नक्सल गतिविधियों से निपटने की जरूरत थी, वहां आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनसेवा की स्थायी व्यवस्था मजबूत हो।

हथियार छोड़ने वालों के लिए पुनर्वास का रास्ता

सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति को केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई है।

सरकार का संदेश है कि जो लोग हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सम्मानजनक जीवन का अवसर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार इसी नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना है।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा बदलाव ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी जवाब है।

युवाओं के लिए शिक्षा पर बड़ा फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ बनने के समय प्रदेश में सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।

प्रदेश में IIT, IIM और IIIT जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से UPSC की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। वहीं प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

नई औद्योगिक नीति से 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ में उद्योग और रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के जरिए राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया गया है। अब तक करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

सरकार का कहना है कि लक्ष्य केवल निवेश लाना नहीं है। असली उद्देश्य निवेश के जरिए प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी दिशा में एक हजार युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

किसान परिवार से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने अपनी जीवनयात्रा भी साझा की। उन्होंने बताया कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। महज 10 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करने के दौरान उन्होंने मेहनत, धैर्य और जिम्मेदारी को करीब से सीखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में आने की उनकी पहले से कोई योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर उन्होंने पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा। पांच वर्ष तक पंच के रूप में काम करने के बाद गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना।

इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला। केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद आज वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

CM साय का विजन—2047 तक विकसित छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की चुनौती कम होने के साथ बस्तर समेत पूरे प्रदेश में विकास की नई गति दिखाई दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी मजबूत भूमिका निभाएगा।

बस्तर की नई कहानी का सार

कभी नक्सल हिंसा के कारण विकास से दूर रहे बस्तर में अब सरकार सुरक्षा से शांति, शांति से विकास और विकास से रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का दावा कर रही है।

सड़क और स्कूल से लेकर स्वास्थ्य, पर्यटन, पशुपालन, उद्योग और रोजगार तक सरकार का फोकस एक ही दिशा में है—बस्तर को विकास की मुख्यधारा में पूरी तरह जोड़ना।

यही वह बदलाव है जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिखता हुआ छत्तीसगढ़ बता रहे हैं।

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