बिलासपुर में फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाला: सिम्स की पूर्व डॉक्टर गिरफ्तार, कई और नाम जांच के घेरे में

बिलासपुर। बहुचर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स की पूर्व डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर सर्पदंश से मौत की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकारी मुआवजा दिलाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, डॉ. प्रियंका सोनी का नाम सिर्फ बिल्हा ही नहीं, बल्कि तोरवा और सिविल लाइन थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में भी सामने आया है। सिविल लाइन पुलिस उनसे अलग से पूछताछ की तैयारी कर रही है। वहीं, जांच के दौरान सिम्स के कई अन्य डॉक्टर भी पुलिस की जांच के दायरे में आए हैं और उनसे पूछताछ जारी है।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाकर दिलाया गया मुआवजा
जांच में सामने आया है कि सर्पदंश से मौत होने पर शासन की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। आरोप है कि इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौतों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश बताकर सरकारी मुआवजा दिलाया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब तहसील कार्यालय के नायब नाजिर ने मोहम्मद निसार खान और लता सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामलों में शिकायत दर्ज कराई। जांच में आरोप है कि दोनों मामलों में डॉ. प्रियंका सोनी द्वारा तैयार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सर्पदंश बताया गया, जबकि वास्तविक कारण अलग था।
वकील, परिजन और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप
पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। तोरवा पुलिस पहले ही मृतक निसार खान की पत्नी सुमीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं, गिरोह का कथित मास्टरमाइंड वकील श्रवण वरस्कार अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
इससे पहले 16 जुलाई को सरकंडा पुलिस ने फर्जी सर्पदंश के पांच मामलों में वकील हीरासाद खांडेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेंद्र कुमार, एसडीएम कार्यालय के रीडर रवीशंकर बिंदवार, नरेंद्र कौशिक, तहसीलदार कार्यालय के रीडर हरीशंकर राठौर और दैनिक वेतनभोगी चालक गोविंद विश्वकर्मा को भी गिरफ्तार किया था।
पांच साल के रिकॉर्ड की जांच, कई डॉक्टरों से पूछताछ
घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने सिविल लाइन स्थित सिम्स का वर्ष 2020 से 2025 तक का मर्ग रजिस्टर जब्त कर लिया है। रिकॉर्ड के अनुसार, इन छह वर्षों में कुल 2,932 मर्ग दर्ज किए गए। इनमें विभिन्न थाना क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सर्पदंश से मौत के मामले सामने आए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन मामलों में करीब 80 प्रतिशत विवेचना तत्कालीन सिम्स चौकी प्रभारी गुलाब सोनवानी ने की थी। उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनके घर पर तलाशी भी ले चुकी है, हालांकि अब तक किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच जारी, सामने आ सकते हैं और बड़े नाम
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में मामले की गहन जांच की जा रही है। एडिशनल एसपी, सीएसपी और संबंधित थाना प्रभारियों की टीम जांच में जुटी है। पुलिस अब तक 15 से अधिक स्थानों पर दबिश दे चुकी है और जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य डॉक्टरों या अधिकारियों की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









