शिलान्यास पर घमासान: भूपेश बोले- ‘क्रेडिट’ ले रही सरकार, सीएम साय का जोरदार पलटवार- 5 साल सोती रही कांग्रेस
छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों ‘शिलान्यास’ को लेकर एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। रायपुर मेडिकल कॉलेज में नए छात्रावास (हॉस्टल) के प्रस्तावित शिलान्यास ने सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सोशल मीडिया पर साय सरकार की घेराबंदी करने के बाद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी मोर्चा संभाल लिया है और कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है।
भूपेश बघेल का हमला: “उसी काम का दोबारा शिलान्यास कर श्रेय ले रही सरकार
इस सियासी जंग की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार पर प्रशासनिक लीपापोती और केवल राजनीतिक ‘क्रेडिट’ लेने का गंभीर आरोप लगाया। बघेल का दावा है कि मेडिकल छात्रों के इस नए छात्रावास भवन को कांग्रेस सरकार के दौरान साल 2021 में ही हरी झंडी मिल चुकी थी और इसका शिलान्यास भी कर दिया गया था, उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट की लागत तय होने से लेकर ठेकेदार तक का चयन कांग्रेस काल में हो चुका था। वर्तमान सरकार ने सिर्फ बजट बढ़ाया है और अब दोबारा शिलान्यास का ‘प्रपंच’ रच रही है। पूर्व सीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे सरकार को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री साय से अपील की कि वे ऐसे आयोजनों से बचें, बल्कि सरकार को इस बात पर शर्मिंदा होना चाहिए कि इतने सालों बाद भी निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो पाया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पलटवार: “5 साल हाथ पर हाथ धरे बैठी रही कांग्रेस, अब फैला रही भ्रम”
भूपेश बघेल के इस हमले पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी बेहद आक्रामक अंदाज़ में जवाब दिया। सीएम साय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरी लेत-लतीफी का ठीकरा कांग्रेस के 5 साल के शासनकाल पर ही फोड़ दिया।
सीएम विष्णुदेव साय का दो टूक बयान: “कांग्रेस को खुद तो कुछ करना नहीं है, बस जनता के बीच गलतफहमी और भ्रम पैदा करना उनकी राजनीतिक संस्कृति बन चुकी है। हकीकत यह है कि डॉ. रमन सिंह की भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही इस मेडिकल कॉलेज छात्रावास और कैंसर भवन को स्वीकृति मिली थी। लेकिन इसके बाद आए कांग्रेस के पांच सालों के शासनकाल में इस बेहद जरूरी परियोजना पर कोई ठोस काम नहीं किया गया, इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।”

सियासी गलियारों की हलचल
इस हाई-प्रोफाइल वार-पलटवार के बाद साफ है कि मेडिकल कॉलेज हॉस्टल का यह शिलान्यास समारोह अब सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह आगामी चुनावी और राजनीतिक बिसात का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस ‘क्रेडिट वॉर’ की गूंज और तेज होने के आसार हैं।









