LIVE UPDATE

बनारस ने नामवर को नामवर बनाया : काशीनाथ सिंह

नामवर बनारस में न होते तो नामवर, नामवर न होते. उन्हें नामवर बनारस ने बनाया; उन्हें दिल्ली ने नामवर नहीं बनाया. हिंदी के वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह ने नामवर सिंह : आलोचना और वैचारिकता विषयक त्रि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि  नामवर सिंह की कक्षाओं के बारे में जाने बिना उन्हें पूरी तरह नहीं जाना जा सकता. क्लास में जगह न होने की वजह से विद्यार्थी खिड़की और दरवाजों के पास खड़े होकर सुना करते थे. इनकी कक्षाओं में अन्य विषयों के विद्यार्थी भी यह देखने आते थे कि क्या पढ़ा रहे हैं जो इतनी भीड़ है.

नामवर वह फूल हैं जिनकी सुगंध अभी बाकी है

नामवर सिंह की शिक्षा और अध्यापन की शुरुआत यहीं हिंदी विभाग से हुई थी. ऐसे में इस विभाग द्वारा यह आयोजन उनको याद करने का महत्वपूर्ण उपक्रम है. फुलवा मरिगा रह गई बास— मेरे लिए नामवर वह फूल हैं जो अब नहीं हैं लेकिन उनकी सुगंध अभी भी जीवन में है. प्रो काशीनाथ सिंह ने प्रेमचंद सभागार, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उक्त विचार व्यक्त किए. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा प्रो नामवर सिंह की जन्मशती पर आयोजित  संगोष्ठी का शुभारंभ उद्घाटन-सत्र में महामना मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया.

ये खबर भी पढ़ें…
Breaking News; भारत में Telegram पर अस्थायी रोक, मोदी सरकार का बड़ा फैसला; मैसेज एडिटिंग फीचर भी रहेगा बंद, जानिए क्या है वजह
Breaking News; भारत में Telegram पर अस्थायी रोक, मोदी सरकार का बड़ा फैसला; मैसेज एडिटिंग फीचर भी रहेगा बंद, जानिए क्या है वजह
June 16, 2026
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। NEET UG की दोबारा परीक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए टेलीग्राम पर अस्थाई...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इसके बाद विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार कुलगीत गायन किया गया. इसके उपरांत मंचस्थ अतिथियों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं पुस्तकें भेंटकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया गया. संगोष्ठी का उद्घाटन वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने कहा कि नामवर  की पूरी आलोचना साहित्य की श्रेष्ठता को पहचानने का प्रयास है. उनके अनुसार श्रेष्ठ कवि वक्तव्य देने के बजाय क्षण की सृष्टि करता है. भाव सबलता और बहुलता किसी कविता को श्रेष्ठ बनाते हैं. ढेर सारे द्वंद्वों का समाहार रचना को श्रेष्ठता प्रदान करता है. जो शब्द मुद्रित हैं वही अंतिम सत्य हैं.

नामवर ने हिंदी को समृद्ध किया

संगोष्ठी का बीज वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ कथाकार एवं तद्भव के संपादक अखिलेश ने कहा कि हिंदी की लगभग हर बहस में नामवर सिंह उपस्थित रहे. उन्होंने हमारी भाषा को अपने मेधा और साहस के बल पर उत्तरोत्तर समृद्ध किया. उन्होंने अपने नये-नये पाठ्यक्रमों के जरिये हमारी भाषा को जो सम्मान दिलाया वह महत्वपूर्ण है. नामवर  ने व्याख्यान को एक कला और संरचना की तरह रचा था. इन्होंने वक्तृता को एक विधा के रूप में स्थापित किया. इनको सुनने के लिए हिंदी साहित्य के इतर के लोग भी उत्सुक रहा करते थे. नामवर  का व्यक्तित्व बहुआयामी था. वे संस्कृति और साहित्य में बहुलता का सम्मान करते थे. नामवर सिंह ने अपभ्रंश, कहानी, उपन्यास, छायावाद आदि की नयी व्याख्या करके पुनर्स्थापित किया. वे पुराने रचनाकारों के बजाय नयी रचनात्मकता की सोहबत में रहना पसंद करते थे. वे निश्चितवाद के हमेशा विरुद्ध रहते थे.

ये खबर भी पढ़ें…
Guru Randhawa के जिम पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, Lawrence Bishnoi गैंग से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार
Guru Randhawa के जिम पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, Lawrence Bishnoi गैंग से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार
June 17, 2026
दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित Punjabi Singer Guru Randhawa के जिम के बाहर हुई फायरिंग मामले में क्राइम ब्रांच को...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

स्वागत वक्तव्य देते हुए हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो वशिष्ठ अनूप ने कहा कि नामवर सिंह ने भारतीय ज्ञान और आलोचना परंपरा में बहुत सार्थक हस्तक्षेप किया है. इन्होंने आलोचना की बहुत सारी परिभाषाएं बदल दी हैं. संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तावित करते हुए प्रो मनोज कुमार सिंह ने कहा कि वे सिर्फ साहित्य के आलोचक नहीं थे, बल्कि उनके लिए आलोचना जीवन की आलोचना थी. जीवन जीने के लिए जो भी बाधा उत्पन्न हो रही थी नामवर जी ने उन सभी की सविवेक आलोचना प्रस्तुत की. सरहपा से लेकर समकालीन हिंदी रचनाकारों तक पर उन्होंने लिखा.

नामवर की रचनाओं में समर्पित शिक्षक का तेज नजर आता है

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजविज्ञानी प्रो आनंद कुमार ने कहा कि नामवर सिंह ने अपनी धोती कुर्ता, तनी हुई गर्दन और गंभीर विवेक से दिल्ली शहर में मशाल की तरह रौशनी की. दिल्ली शहर की कोई भी गोष्ठी नामवर जी के बिना संभव नहीं होती थी. वे सभा-सेमिनारों में दंगल की तरह चुनौती दिया करते थे. उनकी रचनाओं में सर्वकालिक बुद्धिजीवी और समर्पित शिक्षक का तेज दिखाई पड़ता है.

ये खबर भी पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: बलौदाबाजार हिंसा केस में सरकार से जवाब तलब, 17 जुलाई को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: बलौदाबाजार हिंसा केस में सरकार से जवाब तलब, 17 जुलाई को अगली सुनवाई
June 19, 2026
नई दिल्ली। बलौदाबाजार हिंसा और आगजनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

हिंदी की प्रवासी साहित्यकार डॉ दिव्या माथुर ने अपने अतिथि वक्तव्य में कहा कि नामवर  जितना अच्छा लिखते थे उतना अच्छा ही बोलते भी थे. नामवर सिंह ने ‘दूसरी परंपरा की खोज’ और ‘वाद-विवाद-संवाद’ किताब में प्रवासी साहित्य के लेखकों को काफी सराहा है. नामवर सिंह पर पाश्चात्य विचारकों ल्योतार, मिशेल फूको और टेरी ईगल्टन आदि का प्रभाव है.”

उद्घाटन सत्र का संचालन हिंदी विभाग के आचार्य प्रो नीरज खरे ने और धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के ही आचार्य प्रो प्रभाकर सिंह ने किया. कार्यक्रम में प्रो बलिराज पांडेय, प्रो अवधेश प्रधान, प्रो सदानंद शाही, प्रो राजकुमार, प्रो शशिकला त्रिपाठी, प्रो विनय कुमार सिंह, प्रो श्रद्धा सिंह, प्रो कृष्णमोहन पांडेय, प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो प्रभाकर सिंह, प्रो कृष्णमोहन सिंह, प्रो बसंत त्रिपाठी, डॉ रामाज्ञा राय, पल्लव, डॉ किंगसन सिंह पटेल, अनीता गोपेश, डॉ सूर्यनारायण, डॉ मोतीलाल, शिव कुमार पराग, उज्ज्वल भट्टाचार्य, डॉ राहुल चतुर्वेदी, विवेक निराला, डॉ महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ विवेक सिंह, डॉ प्रभात कुमार मिश्र, डॉ मुशर्रफ अली, डॉ रविशंकर सोनकर, डॉ विंध्याचल यादव, डॉ सुशील सुमन, डॉ मानसी रस्तोगी, डॉ राज कुमार मीणा, डॉ प्रीति त्रिपाठी, विहाग वैभव, डॉ आशा यादव आदि बनारस एवं देश के गणमान्य विद्वानों के साथ ही भारी संख्या में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *