CG-सुकमा की पुनर्वासित बेटियों ने रायपुर में दिखाया हुनर, हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर पेश की नई उम्मीद की मिसाल

रायपुर, 10 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में ग्रामोद्योग विभाग की पहल से सुकमा के चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने पहली बार राजधानी रायपुर के बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित फैशन शो में इन बेटियों ने मिस इंडिया ईस्ट अनुष्का सोन के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक किया।
यह आयोजन सिर्फ फैशन शो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुनर्वास के बाद आत्मसम्मान और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही इन बेटियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

हथकरघा परिधानों में दिखा छत्तीसगढ़ी गौरव
फैशन शो के दौरान चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा से तैयार परिधानों को पहनकर रैंप वॉक किया। उनके साथ मिस इंडिया ईस्ट अनुष्का सोन भी शामिल हुईं।
इस दौरान पुनेम देवे, माड़वी देवे, माड़वी माल्ले, मिडियम गांगी, माड़वी नान्दनी, डोंडी रामे, माड़काम भीमे, पोड़ियाम राजे, पुनेम ज्योति और हिड़मे मारकाम ने रैंप पर अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया।

हिंसा से विकास और भय से विश्वास की ओर बढ़ते कदम
कार्यक्रम में इन बेटियों की मौजूदगी को केवल फैशन और मनोरंजन से जोड़कर नहीं देखा गया। यह हिंसा से विकास, भय से विश्वास और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बनकर सामने आया।
ग्रामोद्योग विभाग की इस पहल ने पुनर्वासित महिलाओं और युवतियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक हथकरघा कला को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया।

मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने बढ़ाया हौसला
पुनर्वासित बेटियों की प्रस्तुति देखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की। दोनों ने मंच पर पहुंचकर इन बेटियों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की मौजूदगी और प्रोत्साहन से बेटियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ नजर आया।
चिंतलनार की बेटियों के लिए नई पहचान का मंच
ग्रामोद्योग विभाग की पहल से छत्तीसगढ़ में पहली बार चिंतलनार की पुनर्वासित बेटियों को राजधानी के बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। हथकरघा परिधानों में उनकी रैंप वॉक ने यह संदेश दिया कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो पुनर्वासित बेटियां भी अपनी पहचान बना सकती हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ सकती हैं।
यह पहल छत्तीसगढ़ में पुनर्वास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय हथकरघा परंपरा को एक साथ जोड़ने वाली उल्लेखनीय पहल के रूप में सामने आई।









