LIVE UPDATE
Trending

छत्तीसगढ़ में अटैचमेंट का ‘खेल’ खत्म: साय सरकार का बड़ा फैसला, इन दफ्तरों से हटेंगे राज्य स्तरीय अफसर; जानिए क्यों लिया गया यह फैसला?

रायपुर, 12 जून 2026। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और ‘अटैचमेंट’ (संलग्नती) की संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी नए संशोधित आदेश के मुताबिक, अब प्रदेश के विधायक अपने कार्यालयों में राज्य मुख्यालय या राज्य स्तरीय कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मचारियों को अटैच नहीं करवा सकेंगे।

 सरकार ने साल 2019 में जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन करते हुए यह फैसला लिया है कि विधायक राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं ले सकेंगे, लेकिन राज्य मुख्यालय या राज्य स्तरीय कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने साथ अटैच नहीं कर पाएंगे.

ये खबर भी पढ़ें…
CG पूर्व CEO समेत 9 पर FIR; छत्तीसगढ़ में 1.32 करोड़ का DMF घोटाला! पुलिस ने मामला दर्ज किया
CG पूर्व CEO समेत 9 पर FIR; छत्तीसगढ़ में 1.32 करोड़ का DMF घोटाला! पुलिस ने मामला दर्ज किया
October 27, 2026
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सरकार ने साल 2019 के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। हालांकि, इस नए नियम में सांसदों को विशेष छूट दी गई है, जिसे लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या है नया आदेश और क्या बदला?

राज्य सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार:

ये खबर भी पढ़ें…
साय कैबिनेट में कई बड़े फैसले; 15 नवंबर से धान खरीदी, 200 यूनिट बिल तक रहेगा आधा, CG कर्मचारियों को लेकर बड़ा निर्णय..19 फैसलों पर लगी मुहर
साय कैबिनेट में कई बड़े फैसले; 15 नवंबर से धान खरीदी, 200 यूनिट बिल तक रहेगा आधा, CG कर्मचारियों को लेकर बड़ा निर्णय..19 फैसलों पर लगी मुहर
October 27, 2026
रायपुर 27 अक्टूबर 2026। विष्णुदेव साय कैबिनेट की बैठक खत्म हो गयी है। कैबिनेट में कई अहम फैसलों पर मुहर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

  • विधायकों के लिए नियम: विधायक अब राज्य के किसी भी जिले में पदस्थ स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं तो ले सकेंगे, लेकिन वे मंत्रालय, संचालनालय या किसी भी राज्य स्तरीय मुख्य कार्यालय के स्टाफ को अपने साथ अटैच नहीं कर पाएंगे।

  • सांसदों को विशेष छूट: सांसदों के लिए यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। सांसद अपनी आवश्यकता के अनुसार राज्य स्तरीय कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं पहले की तरह ले सकेंगे।

    ये खबर भी पढ़ें…
    बिलासपुर में तूफान का अलर्ट: कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संभाली कमान, 80 किमी की रफ्तार से चली हवा तो क्या होगा इंतजाम?
    बिलासपुर में तूफान का अलर्ट: कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संभाली कमान, 80 किमी की रफ्तार से चली हवा तो क्या होगा इंतजाम?
    October 27, 2026
    बिलासपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में संभावित तूफान को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया...
    Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

क्यों लिया गया यह फैसला?

राज्य मुख्यालयों (मंत्रालय और संचालनालयों) में नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन होता है। वहां के अधिकारियों या लिपिकीय स्टाफ के जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में अटैच हो जाने से मुख्य विभागों का कामकाज प्रभावित होता था और मैनपावर की कमी हो जाती थी। इस फैसले से राज्य स्तरीय कार्यालयों में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ेगा।

सांसदों और विधायकों के लिए अलग नियम क्यों?

इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सांसदों को छूट और विधायकों पर पाबंदी क्यों? इसके पीछे का मुख्य कारण ‘कार्यक्षेत्र का दायरा’ बताया जा रहा है।

सांसदों का बड़ा क्षेत्र: एक लोकसभा सांसद के कार्यक्षेत्र में 8 से 9 विधानसभाएं आती हैं, वहीं राज्यसभा सांसद का प्रभाव पूरे प्रदेश में होता है। उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय और बड़े विकास कार्यों के लिए राज्य स्तरीय अधिकारियों की जरूरत पड़ती है।

विधायकों का स्थानीय फोकस: विधायक का कार्यक्षेत्र एक सीमित विधानसभा होता है, इसलिए सरकार का मानना है कि वे स्थानीय (जिला स्तर) के अमले से जनता की समस्याओं का निपटारा बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *