LKG पर रोक से भड़का गुस्सा! आत्मानंद स्कूलों में गरीब बच्चों की अंग्रेजी शिक्षा पर ‘ताला’, शैलेश पांडेय के नेतृत्व में कलेक्टर तक पहुंचा आक्रोश
बिलासपुर में पालकों का फूटा आक्रोश, बोले- निजी स्कूलों की महंगी फीस से राहत का एक रास्ता भी क्यों बंद किया जा रहा?

बिलासपुर। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में LKG कक्षा में प्रवेश बंद किए जाने के निर्देश को लेकर बिलासपुर में पालकों का आक्रोश सामने आया है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी स्तर से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई उनके बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का सबसे सुलभ माध्यम बनी हुई है। ऐसे में LKG में प्रवेश पर रोक से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।
इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में पालक पूर्व विधायक शैलेश पांडेय के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर LKG कक्षाओं में प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की।

गरीब परिवारों का सवाल- निजी स्कूलों की फीस कैसे भरेंगे?
पालकों का कहना है कि निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बच्चों की शुरुआती शिक्षा से ही फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य खर्च का बोझ बढ़ जाता है। रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, ठेला और सब्जी विक्रेता तथा रोज कमाकर परिवार चलाने वाले मजदूरों के लिए यह खर्च उठाना आसान नहीं है।
ऐसे में आत्मानंद स्कूलों की LKG कक्षाएं गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम शिक्षा की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण रास्ता बनी हुई थीं। पालकों का सवाल है कि जब सरकारी स्तर पर अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो फिर शुरुआती कक्षा में प्रवेश का रास्ता क्यों बंद किया जा रहा है?

LKG बंद हुई तो सबसे ज्यादा असर किस पर?
पालकों ने कहा कि LKG में प्रवेश बंद होने का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जो निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन नहीं कर सकते, लेकिन अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने का सपना देखते हैं।
उनका कहना है कि आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी से प्रवेश की सुविधा ने ऐसे परिवारों को शिक्षा का बेहतर विकल्प दिया था। अब इस सुविधा पर रोक से गरीब बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम की शुरुआती शिक्षा मुश्किल हो सकती है।

शैलेश पांडेय बोले- गरीब बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं
पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने पालकों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मानंद स्कूलों की मूल भावना ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना रही है।
उन्होंने प्रशासन और सरकार से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने और LKG में प्रवेश की व्यवस्था को जारी रखने की मांग की।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
पालकों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में LKG कक्षाओं को यथावत संचालित करने और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की है।
अब यह मामला केवल एक कक्षा में एडमिशन का नहीं, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों की शुरुआती अंग्रेजी शिक्षा तक पहुंच से जुड़ा मुद्दा बन गया है। पालकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगा।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार और प्रशासन LKG में प्रवेश बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा, या गरीब बच्चों के लिए आत्मानंद स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा का यह रास्ता बंद ही रहेगा?









