पूर्व IAS नागपुर से गिरफ्तार; पुलिस ने कोर्ट के वारंट पर की बड़ी कार्रवाई; घोषित किए गए थे फरार

नागपुर@cgnews24/ मध्य प्रदेश के पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। भोपाल की अदालत में लंबित मामले की सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहने और नोटिस का जवाब नहीं देने के बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कल्पना कोतवाल की अदालत के आदेश पर यह कार्रवाई हुई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, थेटे को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के तहत फरार घोषित किया गया था। गिरफ्तारी के बाद अब अदालत में उनकी पेशी और मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।

रमेश थेटे और उनकी पत्नी मंदा थेटे के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में मामला दर्ज किया था। जांच का आधार वर्ष 2012-13 के दौरान विभिन्न बैंकों से लिए गए करीब 68 लाख रुपये के कर्ज और कम समय में उसके भुगतान से जुड़े लेन-देन बने।
लोकायुक्त को मिली शिकायत के बाद वर्ष 2013 में प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी। जांच में बैंक खातों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई। आरोप है कि इस दौरान थेटे की आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति के संकेत मिले। इसी आधार पर रमेश थेटे और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष और वर्तमान मुकदमे की स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।

1993 बैच के IAS अधिकारी रहे थेटे
रमेश थेटे वर्ष 1993 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। अपने सेवाकाल के दौरान वह कई विवादों और कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहे। उन्होंने पूर्व में आरोप लगाया था कि दलित समुदाय से आने के कारण उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2002 में जबलपुर में रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग में पदस्थ रहने के दौरान लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें बैतूल ITI के प्राचार्य से एक लाख रुपये की कथित रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया था। इस प्रकरण में वर्ष 2007 में विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दिसंबर 2009 में निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा संबंधी फैसले को निरस्त कर दिया था।

उज्जैन में पदस्थापना के दौरान भी लगे थे आरोप
थेटे के खिलाफ उज्जैन संभाग में अपर आयुक्त के पद पर रहते हुए सीलिंग की जमीन निजी व्यक्तियों को आवंटित करने सहित अन्य अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। इन मामलों में अभियोजन की मंजूरी और कानूनी कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ।
उनके खिलाफ दर्ज मामलों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए सभी मामलों की वर्तमान स्थिति और उनमें आरोप तय होने या दोषसिद्धि का विवरण संबंधित न्यायालयों के रिकॉर्ड से अलग-अलग सत्यापित किया जाना जरूरी है। फिलहाल, नागपुर से गिरफ्तारी के बाद इस मामले में अदालत की अगली कार्रवाई अहम होगी।









