अब ऑटो-टैक्सी का झंझट खत्म! बिलासपुर स्टेशन पर ₹100 में मिलेगी बाइक, 24 घंटे सेवा

बिलासपुर। ट्रेन से बिलासपुर पहुंचे और स्टेशन से बाहर निकलते ही ऑटो-टैक्सी के लिए मोलभाव शुरू? अब इस झंझट से यात्रियों को राहत मिलने वाली है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अब महज 100 रुपए में बाइक किराए पर मिलेगी। यात्री बाइक लेकर सीधे अपने गंतव्य तक जा सकेंगे और वह भी अपनी सुविधा के हिसाब से।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बिलासपुर स्टेशन पर अपनी पहली बाइक रेंटल सेवा शुरू कर दी है। स्टेशन परिसर में कोच रेस्टोरेंट के पास शुरू हुई यह सुविधा 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहेगी।

₹100 में 4 घंटे तक बाइक अपने नाम
बाइक लेने के लिए यात्रियों को ज्यादा जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। रेलवे ने किराया भी बेहद किफायती रखा है। 4 घंटे तक बाइक का किराया सिर्फ 100 रुपए होगा। इसके बाद अवधि के हिसाब से किराया बढ़ेगा।
किराये की दरें इस तरह हैं—

- 4 घंटे तक — ₹100
- 4 से 8 घंटे — ₹200
- 8 से 16 घंटे — ₹300
- 16 से 24 घंटे — ₹400
यानी पूरे दिन के लिए भी बाइक लेने पर किराया 400 रुपए रहेगा।
स्टेशन से निकलते ही हाथ में होगी बाइक
इस सेवा का सबसे बड़ा फायदा उन यात्रियों को मिलेगा, जिन्हें स्टेशन से शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाना है। ऑटो या टैक्सी के इंतजार में समय गंवाने के बजाय यात्री बाइक लेकर सीधे अपने काम पर निकल सकेंगे।

पर्यटक शहर घूमने के लिए, छात्र कॉलेज या हॉस्टल जाने के लिए और बिजनेस ट्रैवलर्स अपने काम के सिलसिले में इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे।
लाइसेंस और आधार कार्ड जरूरी
बाइक रेंटल सेवा का लाभ लेने के लिए यात्री के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड होना जरूरी है। सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध होने के कारण यात्रियों को देर रात या सुबह के समय भी स्टेशन से निकलने में परेशानी नहीं होगी।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पहली बाइक रेंटल सेवा
सेवा का शुभारंभ प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक विजय कुमार ने फीता काटकर किया। इस दौरान वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह समेत वाणिज्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
रेलवे का कहना है कि इस सेवा का उद्देश्य यात्रियों को स्टेशन से शहर तक पहुंचने के लिए सस्ता, तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।
कुल मिलाकर, बिलासपुर स्टेशन पर शुरू हुई यह सुविधा उन यात्रियों के लिए काफी राहत वाली है, जिन्हें स्टेशन से निकलते ही “ऑटो मिलेगा या नहीं और कितना किराया लगेगा” जैसी चिंता रहती थी। अब जरूरत के मुताबिक बाइक लीजिए और अपनी मंजिल की ओर निकल पड़िए।









