CG Child Development: पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, कुपोषण में आई कमी; 11 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हो रहे आधुनिक

रायपुर, 5 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार बच्चों के पोषण, संरक्षण और सर्वांगीण विकास को लेकर लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य ने पोषण, आंगनबाड़ी सेवाओं, बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों के चलते पोषण पखवाड़ा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि बच्चों में कुपोषण के विभिन्न मानकों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
11 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हो रहे आधुनिक
प्रदेश में 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज लर्निंग एड (BaLA) पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल आधारित शिक्षण गतिविधियां और बच्चों के लिए आकर्षक शिक्षण वातावरण तैयार किया जा रहा है।

इसके अलावा मनरेगा के अभिसरण से 2,337 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत 191 नए आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किए गए हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 के अंतर्गत 10 जिलों के 12,964 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।
कुपोषण में दर्ज हुई उल्लेखनीय कमी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में कुपोषण के विभिन्न संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। दिसंबर 2023 की तुलना में जून 2026 तक स्टंटिंग (बौनापन) में 7.82 प्रतिशत, वेस्टिंग में 4.36 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों की संख्या में 2.76 प्रतिशत की कमी आई है। दिसंबर 2023 में बौनापन की दर 30.27 प्रतिशत थी, जो जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत रह गई।

पोषण पखवाड़ा में देशभर में पहला स्थान
राज्य ने राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों के आधार पर छत्तीसगढ़ देश में प्रथम रहा। वहीं अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।
सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह में 71,887 गतिविधियां आयोजित की गईं, जबकि अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़ा के दौरान 34.93 लाख से अधिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

मिशन वात्सल्य से बच्चों को मिला सहारा
मिशन वात्सल्य के तहत अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए राज्य में सेवाओं का विस्तार किया गया है। प्रदेश में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या 109 तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री बाल उदय योजना के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, देखभाल और पुनर्वास का लाभ दिया जा रहा है।
विभाग के अनुसार चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त 1.65 लाख से अधिक कॉलों पर त्वरित कार्रवाई की गई है। वहीं दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चों की संख्या 42 से बढ़कर 234 और स्पॉन्सरशिप योजना से लाभान्वित बच्चों की संख्या 767 से बढ़कर 2,037 हो गई है।
बाल विवाह रोकने में भी मिली सफलता
राज्य सरकार के बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बाल विवाह रोकने के प्रयासों में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़कर 1,382 हो गई है। इसके चलते रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार, बाल संरक्षण सेवाओं के विस्तार और बाल विवाह उन्मूलन जैसे प्रयासों के माध्यम से छत्तीसगढ़ बच्चों के समग्र विकास की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बेहतर पोषण, शिक्षा, सुरक्षा और स्वस्थ भविष्य उपलब्ध कराना है।









