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छत्तीसगढ़ में बदले संपत्ति बिक्री के नियम! नगर निकायों की जमीन-दुकानों की बिक्री के नियम बदले, अब ई-टेंडर से होगा आवंटन, जानें नए Rule

रायपुर, 16 जून 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों की अचल संपत्तियों के विक्रय, पट्टे और हस्तांतरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इसकी अधिसूचना जारी कर सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को नए नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

नए नियमों का उद्देश्य नगर निकायों की जमीन, दुकान, भवन और अन्य अचल संपत्तियों के आवंटन तथा उपयोग में पारदर्शिता लाना है। शासन का मानना है कि इससे संपत्तियों के हस्तांतरण में मनमानी पर रोक लगेगी, विवाद कम होंगे और निकायों को अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

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ई-निविदा प्रक्रिया से होगा संपत्ति का आवंटन

नियमों के अनुसार अब किसी भी नगर निकाय की अचल संपत्ति को बेचने, पट्टे पर देने या अन्य किसी रूप में हस्तांतरित करने के लिए मुख्य रूप से ई-निविदा (ई-टेंडर) प्रक्रिया अपनाई जाएगी। संपत्ति उसी व्यक्ति, संस्था या एजेंसी को दी जाएगी जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सबसे अधिक बोली लगाएगी।

इसके लिए निविदा की सूचना कम से कम 15 दिन पहले जारी करना अनिवार्य होगा। यह सूचना दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाएगी और संबंधित नगर निकाय कार्यालय के सूचना पटल पर भी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोगों को भागीदारी का अवसर मिल सके।

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आरक्षित मूल्य तय करने की स्पष्ट व्यवस्था

सरकार ने संपत्तियों के मूल्य निर्धारण को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए हैं। जमीन का आरक्षित मूल्य संबंधित क्षेत्र की प्रचलित कलेक्टर गाइडलाइन दर के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं भवन या अन्य निर्माणयुक्त संपत्तियों के मामले में निर्माण लागत, विकास कार्यों पर हुए व्यय तथा अन्य संबंधित खर्चों को शामिल कर अंतिम आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य संपत्तियों को कम कीमत पर बेचने या नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतों को समाप्त करना है।

बड़े मामलों में शासन की मंजूरी जरूरी

नए नियमों में संपत्तियों के हस्तांतरण की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों और संस्थाओं की वित्तीय सीमाएं भी तय कर दी गई हैं। बड़े नगर निगमों में मेयर-इन-काउंसिल को 10 करोड़ रुपये तक मूल्य की संपत्तियों के हस्तांतरण की मंजूरी देने का अधिकार होगा।

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इसके ऊपर के मामलों में संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग अथवा राज्य शासन की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की किसी भी संपत्ति के हस्तांतरण के लिए राज्य शासन की मंजूरी अनिवार्य रहेगी।

महिलाओं और दिव्यांगजनों को मिलेगा आरक्षण

नए नियमों में सामाजिक समावेशन और समान अवसर को भी प्राथमिकता दी गई है। संपत्ति आवंटन में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं को प्रत्येक वर्ग में एक-तिहाई (33 प्रतिशत) आरक्षण दिया जाएगा, जबकि दिव्यांगजनों के लिए 2 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें संपत्तियों के आवंटन में समान अवसर मिलेंगे।

उत्तराधिकारियों को नामांतरण की सुविधा

नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी पट्टाधारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके वैधानिक उत्तराधिकारी निर्धारित शुल्क जमा कर संपत्ति का नामांतरण अपने नाम करा सकेंगे। इससे लंबे समय तक लंबित रहने वाले उत्तराधिकार संबंधी मामलों का त्वरित निराकरण हो सकेगा।

विवादित मामलों में सार्वजनिक सुनवाई

सरकार ने विवादित मामलों के समाधान के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। ऐसे मामलों में सार्वजनिक सूचना जारी करने और संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों के न्यायसंगत समाधान का रास्ता खुलेगा।

राज्य शासन के अनुसार, छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम, 2026 के लागू होने से नगरीय निकायों की संपत्तियों के उपयोग, आवंटन और हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और राजस्व उन्मुख बनेगी। साथ ही लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियागत जटिलताओं और शिकायतों का समाधान भी हो सकेगा।

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