NTPC सीपत की राखड़ से खेती चौपट, किसानों ने कलेक्टर से लगाई मुआवजे की गुहार
बिलासपुर, 16 जून 2026। सीपत क्षेत्र में स्थित NTPC के राखड़ बांध से हो रहे कथित जल रिसाव को लेकर किसानों की परेशानी एक बार फिर सामने आई है। भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के नेतृत्व में प्रभावित किसानों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर फसल और कृषि भूमि को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों द्वारा सौंपे गए आवेदन में बताया गया है कि NTPC सीपत के राखड़ बांध क्रमांक-3 से वर्ष 2007 से लगातार जल रिसाव हो रहा है। किसानों का आरोप है कि इस रिसाव से आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे खेती-किसानी करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

प्रभावित किसान लोकेश पटेल मरार ने बताया कि वर्ष 2009 में धान की फसल को नुकसान होने के बाद राज्य सरकार ने मुआवजा देने की व्यवस्था बनाई थी। नियमों के अनुसार धान कटाई के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन कई बार भुगतान में लंबी देरी हो जाती है।


किसानों का कहना है कि लगातार जलभराव और राखड़ मिश्रित पानी के प्रभाव से उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा खेती योग्य नहीं रह गया है। खेतों की उर्वरता प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी गिरावट आई है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने बताया कि खेती ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत है और खेतों की खराब होती स्थिति के कारण आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार वर्ष 2002 से उनके खेतों में ट्यूबवेल स्थापित हैं और वे धान के अलावा सब्जियों तथा अन्य फसलों की खेती करते रहे हैं। लेकिन राखड़ प्रभावित पानी के कारण कृषि गतिविधियां लगातार प्रभावित हो रही हैं।

भारतीय किसान संघ के माध्यम से प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में वर्ष 2009 से अब तक के लंबित मुआवजे का शीघ्र भुगतान करने की मांग की गई है। साथ ही राखड़ जल रिसाव से हुई फसल क्षति, भूमि नुकसान और अन्य आर्थिक हानि का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई है।
किसानों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द राहत उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके और उनकी आजीविका पर मंडरा रहे संकट को कम किया जा सके।










