CM विष्णु देव साय के प्रयासों से जशपुर में आकार ले रही 3147 करोड़ रुपये की भारतमाला परियोजना; जशपुर से रायपुर का सफर होगा आसान,
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगी जशपुर की तस्वीर, राजधानी रायपुर तक का सफर होगा आसान, लगभग 104 किलोमीटर फोरलेन सड़क जशपुर जिले से गुजरेगी, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा, रायपुर तक यात्रा का समय घटकर 5 से 6 घंटे होने की उम्मीद, बिलासपुर, कोरबा और झारखंड से भी बेहतर होगा सड़क संपर्क

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर को अहम बताया जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, करीब 3,147 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत लगभग 104 किलोमीटर फोरलेन सड़क जशपुर जिले से गुजरेगी। इसके पूरा होने से राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, कोरबा और झारखंड की ओर सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों को इस विकास पहल से जोड़ते हुए सरकार का कहना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से जिले में व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, परियोजना की प्रगति और वास्तविक यात्रा समय में कमी को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित निर्माण कार्यों और मार्ग के चालू होने पर निर्भर करेगी।

104 किलोमीटर सड़क, 382 संरचनाएं: परियोजना में क्या-क्या बनेगा?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, पत्थलगांव से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक 104.250 किलोमीटर लंबे खंड पर 3,147 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य शुरू किया गया है। यह 627 किलोमीटर लंबे रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसका लगभग 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ में है।
परियोजना के इस हिस्से में कुल 382 छोटी-बड़ी संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से सात बड़े पुल, 30 छोटे पुल, छह फ्लाईओवर, एक एलिवेटेड वायाडक्ट और वाहनों, पैदल यात्रियों तथा वन्यजीवों की आवाजाही के लिए अलग-अलग अंडरपास शामिल हैं।

व्यापार और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार
बेहतर सड़क संपर्क से जशपुर, पत्थलगांव, कुनकुरी, कांसाबेल और आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। किसानों के उत्पादों और स्थानीय वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत हो सकती है। वहीं, जशपुर के प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने से होटल, होमस्टे, स्थानीय परिवहन और अन्य व्यवसायों को भी अवसर मिल सकते हैं।
कॉरिडोर का उद्देश्य केवल यात्रा को सुगम बनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच औद्योगिक एवं व्यावसायिक परिवहन को मजबूत करना भी है। इससे कोयला, खनिज, इस्पात और अन्य माल की आवाजाही अधिक सुविधाजनक होने की संभावना है।

रायपुर तक 5-6 घंटे में पहुंचने का दावा कितना पक्का?
जशपुर से रायपुर की यात्रा पांच से छह घंटे में पूरी होने का अनुमान राज्य सरकार की ओर से दी गई सामग्री में व्यक्त किया गया है। हालांकि, उपलब्ध NHAI की परियोजना संबंधी जानकारी में इस विशिष्ट यात्रा समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए इसे परियोजना का सुनिश्चित परिणाम बताने के बजाय संभावित लाभ के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित होगा।
इसी तरह, लोहरदगा से धरमजयगढ़ रेल लाइन और अन्य सड़क परियोजनाओं की प्रगति को अलग-अलग परियोजनाओं के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर देखना जरूरी है।
निष्कर्ष: 3,147 करोड़ रुपये की लागत वाला यह सड़क खंड जशपुर और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी सुधारने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। निर्माण पूरा होने के बाद इसका वास्तविक लाभ यात्रा समय, परिवहन लागत, व्यापार और स्थानीय रोजगार पर कितना पड़ेगा, यह परियोजना के संचालन और क्षेत्र में विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा।









