छत्तीसगढ़ के आत्मानंद स्कूल में बांटी आसाराम की किताबें, प्राचार्य हटाए गए; 3 दिन में जांच रिपोर्ट तलब

बलरामपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सरकारी स्कूल के बच्चों को आसाराम बापू की तस्वीर वाली किताब बांटने का मामला तूल पकड़ गया है। वाड्रफनगर विकासखंड के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों को ‘संस्कार सरिता’ नाम की किताब दिए जाने पर अभिभावकों ने कड़ी आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने संबंधित प्राचार्य को पद से हटा दिया है। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी को तीन दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब बच्चे स्कूल से ‘संस्कार सरिता’ किताब लेकर घर पहुंचे। अभिभावकों के मुताबिक, बच्चों ने बताया कि स्कूल में यह किताब बांटी गई थी और इसे पढ़कर परीक्षा देने के लिए कहा गया था। किताब के कवर पर आसाराम की तस्वीर देखकर परिजनों ने आपत्ति जताई और स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए।

अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को इस तरह की किताब बांटने से पहले उसकी सामग्री, उद्देश्य और अनुमति की जांच होनी चाहिए थी। मामला सामने आने के बाद स्कूल में किताबों के वितरण को लेकर विवाद गहरा गया।
आसाराम से जुड़े संगठन से किताबें मिलने का आरोप
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि आसाराम से जुड़े एक संगठन ने स्कूल के प्राचार्य को किताबें उपलब्ध कराई थीं और बाद में उन्हें विद्यार्थियों में बांटा गया। उनका सवाल है कि क्या इस वितरण के लिए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति ली गई थी?

हालांकि, किताबें किसने उपलब्ध कराईं, वितरण के पीछे क्या उद्देश्य था और इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी या नहीं, इन बिंदुओं की जांच होना बाकी है। फिलहाल इन आरोपों पर जांच के निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।
विवाद बढ़ा तो किताबें वापस जमा कराईं
विरोध बढ़ने के बाद स्कूल में बांटी गई अधिकांश किताबें वापस जमा करा ली गईं। लेकिन अभिभावकों की नाराजगी इसके बाद भी बनी रही। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अभिभावकों का कहना है कि सरकारी शिक्षण संस्थान में बच्चों को दी जाने वाली पुस्तकों के चयन और वितरण की स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए। किसी भी किताब को विद्यार्थियों तक पहुंचाने से पहले उसकी उपयुक्तता और वितरण की अनुमति सुनिश्चित करना जरूरी है।
प्राचार्य हटाए गए, तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने संबंधित प्राचार्य को पद से हटा दिया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पूरे घटनाक्रम की जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि किताबें स्कूल तक कैसे पहुंचीं, उन्हें विद्यार्थियों में बांटने का निर्णय किसने लिया, क्या इसके लिए विभागीय अनुमति थी और बच्चों को परीक्षा देने के लिए किताब पढ़ने के निर्देश किस परिस्थिति में दिए गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। फिलहाल, इस मामले ने सरकारी स्कूलों में पाठ्य सामग्री के चयन और वितरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।









