CGPSC Scam: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भर्ती घोटाले के दो आरोपियों को मिली जमानत; आरती वासनिक और ललित गनवीर जेल से होंगे बाहर

नई दिल्ली/रायपुर, 1 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में गिरफ्तार तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को बड़ी राहत देते हुए नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। कोर्ट के फैसले के बाद लंबे समय से न्यायिक हिरासत में चल रहे दोनों आरोपियों को राहत मिली है।

एक साल से ज्यादा जेल में थीं आरती वासनिक
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आरती वासनिक एक वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं और मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि मुकदमे में 100 से अधिक गवाहों की गवाही होनी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। बचाव पक्ष ने कहा कि मुकदमे में देरी आरोपियों की वजह से नहीं, बल्कि अभियोजन स्वीकृति से जुड़े कारणों के चलते हो रही है।

CBI की भूमिका को लेकर भी दी गई दलील
आरती वासनिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. मुरेश के साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि CBI की ओर से आरती वासनिक की किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। साथ ही अदालत को बताया गया कि कथित रूप से मामले से लाभान्वित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां फिलहाल स्थगित हैं। इन परिस्थितियों, आरोपियों की हिरासत की अवधि और ट्रायल में संभावित देरी को आधार बनाते हुए नियमित जमानत की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरती वासनिक और ललित गनवीर को नियमित जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में लगे आरोप समाप्त हो गए हैं। CGPSC भर्ती घोटाले की न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल आगे भी जारी रहेगा।

क्या है CGPSC भर्ती घोटाला?
यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई CGPSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया में गड़बड़ी कर प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर, DSP सहित विभिन्न पदों पर चयनित किए जाने में कथित तौर पर अनियमितताएं हुईं। मामले ने छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा किया था।
CBI कर रही है जांच
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर कार्रवाई की और मामले से जुड़े दस्तावेजों एवं अन्य साक्ष्यों की जांच की। इस मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जमानत के बाद भी जारी रहेगा ट्रायल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आरती वासनिक और ललित गनवीर को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है, लेकिन CGPSC भर्ती घोटाले का असली फैसला अभी बाकी है।
अब निगाहें ट्रायल पर रहेंगी, जहां गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जांच एजेंसी की ओर से पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।









