छत्तीसगढ़ EOW-ACB में बड़ा फेरबदल: 12 पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति खत्म, गृह विभाग को लौटाईं सेवाएं

रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे 12 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं उनके मूल विभाग गृह विभाग को वापस कर दी गई हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में दो अलग-अलग आदेश जारी किए। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं।
वापस बुलाए गए कर्मचारियों में निरीक्षक, उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक और आरक्षक स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें पांच निरीक्षकों के नाम पहले आदेश में दर्ज हैं। दूसरे आदेश में भी निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के साथ अन्य पुलिसकर्मियों की सेवाएं वापस करने का उल्लेख है। हालांकि, आदेशों में इस प्रशासनिक बदलाव की वजह नहीं बताई गई है और न ही आगे की पदस्थापना का उल्लेख किया गया है।

पांच निरीक्षकों समेत सात की पहली सूची
सामान्य प्रशासन विभाग के पहले आदेश में निरीक्षक वीरेंद्र चंद्रा, शरद चंद्रा, बृजेश कुशवाहा, संतराम सोनी और उमेंद्र टंडन के नाम शामिल हैं। इनके साथ दो अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवाएं भी गृह विभाग को वापस की गई हैं।
ये सभी EOW-ACB में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। आदेश के बाद अब उनकी आगे की पदस्थापना गृह विभाग के स्तर पर तय की जा सकती है।

दूसरी सूची में निरीक्षक से आरक्षक तक के नाम
दूसरे आदेश में निरीक्षक पौरुष पुरे और सौरभ द्विवेदी, उपनिरीक्षक जितेंद्र नंदे, सहायक उपनिरीक्षक निर्भय लाल ध्रुव तथा आरक्षक अभिषेक कुमार, रितेश दीवान और सोहन ध्रुव के नाम दर्ज हैं।
आदेश के मुताबिक, इन कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से गृह विभाग को वापस की गई हैं। इस तरह दोनों आदेशों के जरिए EOW-ACB में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं उनके मूल विभाग को लौटाई गई हैं।

आदेश में कारणों का उल्लेख नहीं
दोनों आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से राज्यपाल के नाम से जारी किए गए हैं। इनमें प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवाएं वापस करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह निर्णय प्रशासनिक जरूरतों के तहत लिया गया है । फिलहाल, इसे नियमित प्रशासनिक आदेश के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई या किसी विशेष जांच से इस फैसले को जोड़ने की पुष्टि आदेश में नहीं है।









