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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, SIT जांच और Form-6 बहाल करने की मांग

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े निर्वाचन आयोग के फैसलों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए कथित बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने के साथ SIT या न्यायिक जांच की मांग की है।

याचिका में Form-6 में कथित बदलाव, SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और निर्वाचन आयोग के डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी की गई है। याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है।

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Form-6 में बदलाव पर भी सवाल

याचिका में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किया गया।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन Form-6 में आवेदक से उसके या उसके माता-पिता/दादा-दादी के पिछले SIR के मतदाता रिकॉर्ड में नाम होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। याचिका में मूल Form-6 को बहाल करने की मांग की गई है।

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2023 के कानून की धारा 18 का हवाला

याचिकाकर्ता ने Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा है कि आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए। इसी प्रावधान के आधार पर याचिका में उन फैसलों की वैधानिकता पर सवाल उठाया गया है, जिन्हें याचिकाकर्ता के अनुसार पूरी आयोगीय सहमति के बिना लिया गया।

हालांकि, निर्वाचन आयोग का पक्ष अलग है। आयोग ने कहा है कि पिछले एक साल में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आयोग के भीतर अलग-अलग राय या टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं।

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SIT से जांच की मांग

याचिका में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या SIT गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित जांच में ECINet और ERONet जैसे चुनावी डेटाबेस का फॉरेंसिक ऑडिट कराने तथा SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच की मांग की गई है।

याचिका में करीब 13 करोड़ नामों के हटाए जाने से जुड़े दावे की भी जांच की मांग की गई है। यह आंकड़ा याचिकाकर्ता द्वारा जांच के लिए उठाए गए दावे से संबंधित है, इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

CEC समेत अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और ECI की IT प्रमुख सीमा खन्ना समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कथित वैधानिक उल्लंघनों की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

चुनाव आयोग के फैसलों पर बढ़ी कानूनी निगरानी

यह याचिका ऐसे समय दाखिल हुई है जब SIR, Form-6 और मतदाता डेटा के प्रबंधन को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक और कानूनी बहस चल रही है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले महीनों में कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। वहीं आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह सवाल होगा कि याचिका में उठाए गए आरोपों और मांगी गई राहतों पर अदालत किस तरह विचार करती है।

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