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Liquor Brand Ban: शराब प्रेमियों के लिए आई बुरी खबर, भारत में अब नहीं बिकेंगे ये ब्रांड्स, इस वजह से FSSAI ने ब्रिकी पर लगाया बैन

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। देश के लोकप्रिय शराब ब्रांडो के कुछ उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। FSSAI ने Old Monk, Antiquity Blue, Royal Challenge, Bagpiper Deluxe समेत कुछ शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई शराब में इस्तेमाल किए गए फ्लेवरिंग एजेंट को लेकर की गई है।

इन उत्पादों पर हुई कार्रवाई

FSSAI की जांच में पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे आर्टिफिशियल या ‘नेचर-आइडेंटिकल’ फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनका उद्देश्य संबंधित शराब के प्राकृतिक स्वाद और खुशबू की नकल करना था। नियामक के अनुसार, रम में रम फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की जैसा फ्लेवर मिलाना मौजूदा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है।

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रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में निर्मित Antiquity Blue Whisky, Royal Challenge Whisky, Bagpiper Deluxe Whisky और Old Cask Deluxe XXX Rum के कुछ उत्पादों पर बिक्री रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, महाराष्ट्र स्थित एक निर्माण इकाई में तैयार Old Monk के तीन वैरिएंट भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि आदेश केवल संबंधित निर्माण इकाइयों के उत्पादों पर लागू होगा या अन्य राज्यों में निर्मित वही ब्रांड भी इससे प्रभावित होंगे।

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क्या है पूरा विवाद?

FSSAI के अनुसार, शराब निर्माण में कुछ प्राकृतिक फ्लेवरिंग पदार्थों के उपयोग की अनुमति है, लेकिन ऐसे बाहरी फ्लेवर का इस्तेमाल, जो उत्पाद के मूल स्वाद की कृत्रिम नकल करते हों, नियमों के विपरीत है। नियामक का मानना है कि इससे शराब के वास्तविक निर्माण और परिपक्वता (Aging) की प्रक्रिया को दरकिनार करने की आशंका बढ़ जाती है।

इससे पहले जुलाई में भी FSSAI ने शराब कंपनियों को अनधिकृत फ्लेवर, उम्र (Age) से जुड़े भ्रामक दावों और ब्लेंड की उम्र के उल्लेख को लेकर नोटिस जारी किए थे।

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कंपनियों ने उठाए सवाल

FSSAI की कार्रवाई के बाद उद्योग जगत की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। Diageo India की कंपनी United Spirits ने कहा है कि उसके संबंधित उत्पादों के लेबल मौजूदा नियमों के अनुरूप हैं और यह मुद्दा पूरे उद्योग से जुड़ा हुआ है। कंपनी ने FSSAI के एक आदेश को अदालत में चुनौती भी दी है।

फिलहाल FSSAI की कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित आदेशों का शराब उद्योग और इन ब्रांडों की बिक्री पर आगे क्या प्रभाव पड़ता है।

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