छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: रामगोपाल अग्रवाल और अरुणपति त्रिपाठी को जमानत, जांच एजेंसियों के आरोपों के बीच मिली राहत, जानिए पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और तत्कालीन आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी को जमानत मिलने की खबर से सियासी और कानूनी हलचल तेज। हालांकि, दोनों की जमानत अलग-अलग मामलों और कानूनी कार्यवाहियों से जुड़ी हो सकती है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में रामगोपाल अग्रवाल और अरुणपति त्रिपाठी को जमानत मिलने की खबर सामने आई है। इस मामले में दोनों के नाम कथित शराब सिंडिकेट और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच के दौरान सामने आए हैं। हालांकि, जमानत को लेकर यह समझना जरूरी है कि किसी एक मामले में राहत मिलने का मतलब यह नहीं होता कि आरोपी को घोटाले से जुड़े सभी मामलों में रिहाई मिल गई है।
कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अगस्त 2026 में शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी का आरोप है कि कथित शराब सिंडिकेट से जुटाई गई बड़ी रकम तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश कोषाध्यक्ष के निर्देश पर रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। एजेंसी ने अपनी जांच में करीब 860 से 880 करोड़ रुपये की नकद रकम इस नेटवर्क के जरिए पहुंचने का दावा किया है।

रामगोपाल अग्रवाल पर ईडी के गंभीर आरोप
ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले से हासिल कथित अपराध की कमाई का एक बड़ा हिस्सा नकद के रूप में अलग-अलग माध्यमों से भेजा गया। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस रकम के लेन-देन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका रही। एजेंसी ने उनके खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की है।
ईडी ने अक्टूबर 2026 में रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब स्थित दो फ्लैटों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया था। इन संपत्तियों का मूल्य करीब 9.06 करोड़ रुपये बताया गया।

अरुणपति त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी है राहत
शराब घोटाले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध संचालक रहे अरुणपति त्रिपाठी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया था। ईडी ने मई 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि शराब कारोबार में कथित अवैध कमीशन और अन्य अनियमितताओं के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
अरुणपति त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में जमानत देने का आदेश दिया था। अदालत ने पासपोर्ट जमा करने, जांच अधिकारी के सामने प्रतिदिन उपस्थित होने और जांच में सहयोग करने जैसी शर्तें लगाई थीं।

करीब 3200 करोड़ रुपये का बताया जा रहा घोटाला
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच ईडी और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW)/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कर रही हैं। जांच एजेंसियों ने इस मामले में अवैध कमीशन वसूली, बिना हिसाब की शराब की बिक्री, डिस्टिलरी से कथित भुगतान और FL-10A लाइसेंस व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
अक्टूबर 2026 में एसीबी-ईओडब्ल्यू ने इस मामले में 27 हजार पन्नों का दसवां पूरक चालान पेश किया था। इसमें 20 व्यक्तियों और 22 कंपनियों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसियां इस कथित घोटाले का आकार करीब 3200 करोड़ रुपये बता रही हैं।










