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CG-सरकारी रसूख और हवस का खेल खत्म! नाबालिग से हैवानियत मामले में फूड इंस्पेक्टर और उसका साथी दोषी; मिली 5-5 साल की जेल

रायपुर/बलरामपुर, 7 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से जुड़े बहुचर्चित नाबालिग लैंगिक उत्पीड़न मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। विशेष न्यायालय ने फूड इंस्पेक्टर निखिलेश टेम्भुने और उसके सहयोगी शाहरुख को दोषी करार देते हुए दोनों को 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने मामले से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच कराने के लिए जिला कलेक्टर को भी निर्देश जारी किए हैं।

2022 में दर्ज हुई थी शिकायत

मामले की शुरुआत 11 जनवरी 2022 को हुई थी, जब पीड़िता की मां ने रामानुजगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नाबालिग बच्ची को फूड इंस्पेक्टर के कार्यालय में काम पर रखा गया था, जहां उसके साथ लैंगिक उत्पीड़न किया गया। पुलिस ने जांच के बाद मामला विशेष पॉक्सो न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया।

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POCSO कोर्ट ने दोनों आरोपियों को ठहराया दोषी

विशेष न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट-POCSO) शुभ्रा पचौरी ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फूड इंस्पेक्टर निखिलेश टेम्भुने को पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया।

न्यायालय ने उन्हें विभिन्न धाराओं के तहत 5 वर्ष तक के सश्रम कारावास तथा कुल 24 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सह-आरोपी शाहरुख को पॉक्सो अधिनियम की धारा 16/17 के तहत दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

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फैसले में भ्रष्टाचार की जांच का भी आदेश

इस मामले में न्यायालय ने केवल आपराधिक आरोपों पर ही फैसला नहीं सुनाया, बल्कि सुनवाई के दौरान सामने आए अन्य गंभीर आरोपों पर भी संज्ञान लिया। अदालत ने आदेश दिया कि नाबालिग को कथित रूप से अवैध तरीके से नौकरी पर रखने और राशन कार्ड से जुड़े आवेदकों से पैसे वसूले जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

इसके लिए बलरामपुर-रामानुजगंज कलेक्टर को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने और पूरे मामले की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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फैसले के कई मायने

विशेष पॉक्सो न्यायालय का यह फैसला न केवल नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर सख्त न्यायिक रुख को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि यदि किसी आपराधिक प्रकरण के दौरान भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं तो न्यायालय उन पर भी कार्रवाई के निर्देश देने से पीछे नहीं हटेगा। अब कलेक्टर स्तर पर होने वाली जांच पर भी सबकी नजर रहेगी।

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